केंद्र की मोदी सरकार ने आज एक बड़ा फैसला लिया है। मोदी सरकार ने भारत में खेल के क्षेत्र में दिया जाने वाले सबसे बड़े सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम अब हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम पर कर दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ट्विट करके दी जानकारी
केंद्र सरकार ने आज 6 अगस्त को राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कर दिया है। इस बात की जानकारी खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विट करके दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोगों की भावनाओं को देखते हुए राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम अब मेजर ध्यानचंद के नाम पर किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘देश को गर्वित कर देने वाले पलों के बीच अनेक देशवासियों का ये आग्रह भी सामने आया है कि खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद जी को समर्पित किया जाए, लोगों की भावनाओं को देखते हुए इसका नाम अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया जा रहा है, जय हिंद।’
पीएम मोदी ने की हॉकी खिलाड़ियों की प्रशंसा
प्रधानमंत्री मोदी ने एक अन्य ट्विट में कहा कि ‘ओलंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रयासों से हम सभी अभिभूत हैं, विशेषकर हॉकी में हमारे बेटे-बेटियों ने जो इच्छाशक्ति दिखाई है, जीत के प्रति जो ललक दिखाई है, वो वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है।’
खेल रत्न पुरस्कार को 1991-92 में शुरू किया गया था
खेल रत्न पुरस्कार को 1991-92 में शुरू किया गया था, तब इसका नाम देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर रखा गया था। इस अवार्ड की स्थापना का मुख्य उद्देश्य खेल के क्षेत्र में सराहना और जागरूकता फैलाना है, साथ ही खिलाड़ियों को सम्मानित कर उनकी प्रतिष्ठा बढ़ाना है, ताकि वह समाज में और ज्यादा सम्मान प्राप्त कर सकें। खेल रत्न पुरस्कार में पुरस्कार राशि के तौर पर एक पदक, सम्मान सहित एक प्रमाण पत्र और नकद इनाम मिलता है, वर्तमान में नकद राशि 25 लाख रुपए दिया जाता है।
ध्यानचंद ने 3 बार दिलवाया था ओलंपिक में गोल्ड मेडल
ध्यान रहे कि ‘हॉकी के जादूगर’ कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद ने भारत को लगातार 3 बार ओलंपिक में गोल्ड मेडल दिलवाया था। कहा जाता है कि मेजर ध्यानचंद के मैच देखने वालों को लगता था कि उनकी हॉकी में कोई चुंबक लगा है, इसलिए एक बार मैच के दौरान उनकी हॉकी तक तुड़वाकर देखी गई थी।