North-East Delhi Violence: जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को मिली जमानत

उत्तरी-पूर्वी दिल्ली हिंसा मामले में साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किए गए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर खालिद को अदालत से आज बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की एक अदालत ने आज उमर खालिद को जमानत दे दी है।

कड़कड़डूमा कोर्ट ने दी उमर खालिद को जमानत
दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने आज 15 अप्रैल को फरवरी, 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में आरोपी जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को जमानत दे दी है। कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जस्टिस विनोद यादव ने कहा कि उमर खालिद को मात्र मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन व खालिद सैफी के बयानों के आधार पर आरोपी बनाया गया है, लेकिन ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि उमर खालिद दंगों के षड्यंत्र में शामिल था, वहीं खालिद सैफी को जमानत मिल चुकी है ऐसे में उमर खालिद भी जमानत का हकदार है।

उमर पर है हिंसा की साजिश रचने का आरोप
ध्यान रहे कि उमर खालिद पर उत्तरी-पूर्वी दिल्ली हिंसा की साजिश रचने का आरोप है, दिल्ली पुलिस ने कहा था कि हिंसा से पहले 8 जनवरी, 2020 को खालिद ने ताहिर हुसैन व अन्य से शाहीन बाग इलाके में मुलाकात कर हिंसा की साजिश रची, इसके लिए पहले से तैयार रहने की योजना भी बनाई गई। दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद को हिंसा की साजिश में सक्रिय भूमिका निभाने के आरोप में आतंकवाद निरोधक कानून (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया था।

दिल्ली हिंसा में 53 लोगों की हुई थी मौत
गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थकों और विरोधियों के बीच संघर्ष के बाद 24 फरवरी, 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, घोंडा, चांदबाग, शिव विहार, भजनपुरा, यमुना विहार इलाकों में साम्प्रदायिक दंगे भड़क गए थे। उत्तरी-पूर्वी दिल्ली हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे, साथ ही सरकारी और निजी संपत्तियों को भी काफी नुकसान पहुंचा था, उग्र भीड़ ने कुछ स्कूलों सहित मकानों, दुकानों, वाहनों, एक पेट्रोल पम्प को फूंक दिया था और स्थानीय लोगों तथा पुलिस कर्मियों पर पथराव किया था।

हिंसा के दौरान अंकित शर्मा की हत्या हुई थी
उत्तरी-पूर्वी दिल्ली हिंसा के दौरान राजस्थान के सीकर के रहने वाले दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की 24 फरवरी, 2020 को गोकलपुरी में हुई हिंसा के दौरान गोली लगने से मौत हो गई थी और डीसीपी और एसीपी सहित कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल गए थे, साथ ही आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या करने के बाद उनकी लाश नाले में फेंक दी गई थी।

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