बिहार चुनाव: RJD का घोषणा पत्र जारी, 10 लाख सरकारी नौकरी, 85 फीसदी कोटा बिहारियों के लिए

राष्ट्रीय जनता दल यानि राजद ने बिहार चुनाव, 2020 के पहले चरण के मतदान से चार दिन पहले आज 24 अक्टूबर को अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है। ध्यान रहे कि इससे पहले बिहार विधानसभा चुनाव, 2020 के लिए महागठबंधन की तरफ से संकल्प पत्र जारी किया जा चुका है

युवाओं को मिलेंगे 10 लाख सरकारी नौकरी
राजद का घोषणा पत्र जारी करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि ये घोषणा पत्र हमारा प्रण है, राजद के घोषणा पत्र में 17 प्रतिबद्धताओं को सम्मिलित किया गया है। राजद ने अपने मेनिफेस्टो में बिहार के बेरोजगार युवाओं के लिए 10 लाख सरकारी नौकरी का वादा किया है। राजद के मेनिफेस्टो में वादा किया गया है कि तेजस्वी सरकार बनने के बाद जो कैबिनेट की पहली बैठक होगी, उसमें युवाओं को 10 लाख सरकारी नौकरी देने का वादा पूरा किया जाएगा।

बिहार के युवाओं को 85 फीसदी का आरक्षण
राजद के घोषणा पत्र में बिहार में डोमिसाइल नीति लागू करने का भी वादा किया गया है, मेनिफेस्टो में कहा गया है कि तेजस्वी सरकार बनने के बाद बिहार में डोमिसाइल नीति लागू की जाएगी, जिसके अंतर्गत राज्य सरकार की नौकरियों में बिहार के युवाओं को 85 फीसदी का आरक्षण दिया जाएगा। राजद के वरिष्ठ नेता व सांसद मनोज झा ने राज्य की 85 फीसदी नौकरियों को बिहार के बेरोजगारों के लिए आरक्षित करने के सवाल पर कहा कि हालांकि वे दूसरे राज्यों में इस तरह के आरक्षण का विरोध करते हैं, लेकिन बिहार के लिए यह सही पॉलिसी है, क्योंकि बिहार संसाधन विहीन राज्य है।

प्रतिमाह 1500 रुपया बेरोजगारी भत्ता
ध्यान रहे कि इस बार बिहार चुनाव में बेरोजगारी एक बहुत बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है। राजद के मेनिफेस्टो में युवाओं को लुभाते हुए कहा गया है कि राज्य सरकार की नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवेदन शुल्क शून्य कर दिया जाएगा। मेनिफेस्टो में राजद की सरकार बनने के बाद युवाओं के लिए बिहार युवा आयोग के गठन की भी बात कही गई है। राजद ने वादा किया है कि 35 वर्ष तक के बेरोजगार युवाओं को प्रतिमाह 1500 रुपया बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा।

बिहार में बेरोजगारी दर 10.2 फीसदी
राजद के मेनिफेस्टो में कहा गया है कि शिक्षा से संबंधित 5 लाख रुपए तक के कर्ज को तेजस्वी सरकार माफ करेगी। पीरियोडिक लेबर फोर्स द्वारा कराए गए एक सर्वे के मुताबिक, वर्ष 2018-19 में बिहार में बेरोजगारी दर 10.2 फीसदी है, जो कि राष्ट्रीय औसत से दुगना है, राष्ट्रीय बेरोजगारी औसत इस दौरान 5.8 फीसदी थी। इसी सर्वे के मुताबिक, वर्ष 2018-19 में बिहार में केवल 10.4 फीसदी लोग वेतन भोगी थे, जबकि राष्ट्रीय औसत 23.8 फीसदी था।

12वीं में 80 फीसदी नंबर लाने पर मिलेंगे लैपटॉप
इन आंकड़ों से साफ स्पष्ट होता है कि बिहार में बेरोजगारी हमेशा से ही एक बहुत बड़ा मुद्दा रही है मगर पहली बार चुनाव में किसी ने इस मुद्दे को इस कदर उछाला है कि जनता इससे अपने आप को जोड़कर देख रही है। युवाओं को लेकर एक और महत्वपूर्ण घोषणा जो राजद के मेनिफेस्टो में की गई है वह पिछड़ी जाति और दलित समाज से आने वाले बच्चों को लेकर है, पिछड़ी जाति और दलित समाज के जो बच्चे 12वीं की कक्षा में 80 फीसदी अंक प्राप्त करेंगे, उन्हें राज्य सरकार फ्री लैपटॉप देगी।

शिक्षा बजट जीडीपी का 22 फीसदी
राजद के मेनिफेस्टो में बिहार में शिक्षा के बजट को राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 22 फीसदी करने की भी घोषणा की गई है। मनोज झा ने कहा कि सरकार में आते ही राजद फिर से बिहार के लिए विशेष राज्य के दर्जे का मुद्दा उठाएगी, अब हम खैरात नहीं मांगेंगे, सरकार बनने के 2 महीने के भीतर विधानसभा से बिल पारित कराकर हम फिर से आवेदन देंगे और विशेष राज्य का दर्जा मिलने तक आमरण अनशन करेंगे।

घोषणापत्र में किए गए मुख्य वादे
– नए स्थायी पदों का सृजन कर के कुल 10 लाख सरकारी नौकरियों की बहाली की प्रक्रिया पहले ही कैबिनेट बैठक में पहली दस्तखत के साथ शुरू होगी।
– संविदा प्रथा का खात्मा कर सभी कर्मचारियों को स्थाई कर समान काम समान वेतन दिया जाएगा।
– सभी विभागों में निजीकरण को समाप्त किया जाएगा।
– बिहार में किसान आयोग, व्यवसायी आयोग, युवा आयोग और खेल आयोग का गठन किया जाएगा।
– प्रसव सहयोग 1400 रुपए से बढ़ाकर 4000 रुपए किया जाएगा और आंगनबाड़ी और आशा दीदियों का मानदेय दोगुना किया जाएगा।
– श्रमिकों के हित में सरकारी विभागों उपक्रमों को निजी हाथों में जाने से रोकने का प्रावधान किया जाएगा।
– रोजगार प्रक्रिया में गैर-सरकारी बिचौलियों एजेंसियों को हटाकर सीधा युवाओं को लाभ दिया जाएगा।
– हेल्थ केयर सेक्टर में निजी एवं असंगठित क्षेत्रों के माध्यम से प्रत्यक्ष नौकरियों व परोक्ष रोजगार के लाखों अवसर सृजित किए जाएंगे।
– कॉरपोरेट जगत के तकनीकी प्रशिक्षकों की देखरेख में सरकारी निर्देशानुसार कौशल विकास केंद्रों की स्थापना होगी जहां परंपरागत कौशल के साथ-साथ उद्योग जगत के प्रश्न कौशल सॉफ्ट स्किल्स का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
– कार्यालय सहायक, सांख्यिकी स्वयं सेवक, लाइब्रेरियन, उर्दू शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका, आशा कर्मी, ग्रामीण चिकित्सकों, जीविका दीदियों की मांगों को पूरा किया जाएगा।

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