देश में कोरोना बांटने वाले मरकज की पूरी कहानी जानिए

दक्षिणी दिल्ली का निजामुद्दीन इलाका सोमवार से पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस चर्चा का कारण है निजामुद्दीन में स्थित तबलीगी जमात के मरकज में करीब 2000 लोगों का शामिल होना, जिससे अब पूरे देश में कोरोना वायरस के संक्रमण का डर बना है।

तबलीगी जमात के मरकज में शामिल थे दो हजार लोग

 दक्षिणी दिल्ली का निजामुद्दीन इलाका 30 मार्च, 2020 (सोमवार) से पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। निजामुद्दीन में स्थित तबलीगी जमात के मरकज में करीब 2000 लोगों के शामिल होने से अब पूरा देश कोरोना वायरस के संक्रमण का डर से सहमे हुए है। इस मरकज में शामिल हुए लोगों में हीं अब तक 24 में कोरोना पॉजिटिव केस सामने आया है।

आखिर क्या हुआ था

1 मार्च से 15 मार्च के बीच निजामुद्दीन के तबलीगी जमात के मरकज में करीब 2 हजार लोग शामिल हुए थे, जहां से अब पूरे देश में करोना वायरस के संक्रमण का मामला सामने आया है। मरकज में शामिल हुए लोगों में से कुछ लोग यहां से चले गए थे, जबकि बाकी लोग यहीं पर रुके हुए थे। इस मरकज में शामिल हुए लोगों में से हीं अब तक 24 में कोरोना पॉजिटिव केस सामने आया है। मरकज में शामिल हुए करीब 2 हजार लोगों में करीब 100 लोग बंग्लादेश, अफगानिस्तान, चीन, मलेशिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और ब्रिटेन से थे।

मरकज में शामिल तेलंगाना के 6 लोगों की कोरोना से मौत

तेलंगाना सरकार ने कहा है कि मरकज में शामिल होने के लिए 13 मार्च और 15 मार्च को कई लोग यहां से निजामुद्दीन गए थे, जिसमें से तेलंगाना लौटे 6 लोगों की कोरोना से मौत हो गई है। तेलंगाना सरकार की तरफ आगे कहा गया है कि जो लोग भी मरकज में शामिल हुए थे, उन्हें दिल्ली सरकार को सूचित करे, सरकार उनका जांच और इलाज कराएगी, किसी को भी इस बारे में अगर कोई सूचना है तो वे तेलंगाना सरकार को जरूर बताएं।

मरकज में शामिल लोगों में कोरोना पॉजिटिव केस

29 मार्च के रात में दिल्ली पुलिस को खबर मिली कि निजामुद्दीन के मरकज में शामिल लोगों में कोरोना कोरोना के लक्षण दिखाई दिए हैं, तब दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के अधिकारी मेडिकल टीम को यहां पहुंचे और इलाके को बंद करने के बाद टेस्ट के लिए लोगों को ले जाएगा गया। दरअसल मरकज में शामिल हुए लोगों ने दिल्ली सरकार के आदेश और भारत सरकार के लॉक डाउन के नियमों को तोड़कर इकट्ठे थे, इनमें शामिल लोगों में लगातार कोरोना पॉजिटिव के मामले सामने आ रहे हैं।

निजामुद्दीन का पूरा इलाका सील

इस समय निजामुद्दीन का पूरा इलाका सील कर दिया गया है, इसमें तबलीग-ए-जमात का मुख्य केंद्र, निजामुद्दीन पुलिस स्टेशन तथा निजामुद्दीन औलिया का दरगाह शामिल है। दिल्ली पुलिस यहां मरकज में शामिल लोगों की पहचान करके उन्हें दिल्ली के अस्पतालों में क्वारंटाइन के लिए भेज रहे हैं।

 दिल्ली सरकार ने दिए एफआईआर के आदेश

निजामुद्दीन का मामला आने के बाद सोमवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने निजामुद्दीन के तबलीगी जमात का नेतृत्व करने के लिए एक मौलाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। गौरतलब है दिल्ली सरकार ने मार्च महीने के शुरुआत में हीं कोरोना वायरस माहामारी के कारण 31 मार्च तक किसी भी तरह के धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक आयोजनों पर पाबंदी लगा दिया था। इसके अलावा दिल्ली सरकार ने 50 से ज्यादा लोगों को एक साथ इकट्ठा होने पर भी रोक लगा दी थी, जिसे बाद में घटाकर 5 कर दिया था।

सोमवार को आए थे कोरोना पॉजिटिव के 227 मामले

सोमवार को देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना पॉजिटिव के 227 मामले सामने आए थे, जो अब तक एक दिन में सबसे ज्यादा केस है। सोमवार को दिल्ली में 25 कोरोना पॉजिटिव सामने आए थे।

जेएलएन स्टेडियम को क्वारंटाइन में बदलने का आदेश

निजामुद्दीन का मामला आने के बाद जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम (जेएलएन स्टेडियम) को क्वारंटाइन में बदलने का आदेश दिया गया है। डीडीएमए के चेयरपर्सन हरलीन कौर ने आदेश जारी करते हुए कहा कि जेएलएन स्टेडियम परिसर को कोविड-19 क्वारंटाइन फैसलिटी के तौर पर किया जा सकता है।

तबलीगी जमात ने कोरोना पॉजिटिव केस का खंडन किया

निजामुद्दीन के तबलीगी जमात के प्रवक्ता डॉ. मोहम्मद शोएब ने कहा कि हमने प्रशासन को नामों की लिस्ट दी है, जिन्हें कोल्ड या बुखार थी। उन्होंने कहा कि  कुछ लोगों को उम्र और ट्रैवल हिस्ट्री के आधार पर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, हमारे पास अभी तक कोई कोरोना पॉजिटिव के केस नहीं है। तबलीगी जमात की चिट्ठी के अनुसार, मरकज में शामिल हुए लोगों में आधों को 23 मार्च को निकाल लिया गया था, जबकि बाकी बचे लोग लॉक डाउन के कारण फंसे थे जिनको लेकर तबलीगी जमात प्रशासन के संपर्क में था।

तबलीगी जमात के बारे में कुछ जानकारी

निजामुद्दीन में तबलीगी जमात का मरकज यानि सेंटर होने के चलते देश ही नहीं पूरी दुनिया से लोग यहां आते हैं, इसके बाद उन्हें अलग-अलग ग्रुपों में अलग-अलग शहरों और कस्बों में इस्लाम के प्रचार-प्रसार के लिए भेजा जाता है। इन लोगों को मरकज में इस शहरों और कस्बों के मस्जिदों का ब्योरा वाला लिस्ट दिया जाता है, जहां पहुंच कर ये मस्जिदों में ठहरते हैं।

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