कोरोना के दौरान अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का भारत में आगमन…जानिए इस नई बीमारी के बारे में !

वैश्विक महामारी कोविड-19 के खिलाफ पूरी दुनिया के साथ भारत एकजुट होकर लड़ाई लड़ रहा है, जिसके कारण केंद्र सरकार द्वारा लागू 25 मार्च से 17 मई तक देशव्यापी लॉकडाउन चल रहा है, इस बीच देश में एक नई बीमारी का आगमन शुरू हो चुका है। भारत में जिस नई बीमारी का आगमन हुआ है, वह है अफ्रीकन स्वाइन फ्लू।

अफ्रीक स्वाइन फ्लू का पहला केस असम में सामने आया

वैश्विक महामारी कोविड-19 के खिलाफ पूरी दुनिया के साथ भारत एकजुट होकर लड़ाई लड़ रहा है, जिसके कारण केंद्र सरकार द्वारा लागू 25 मार्च से 17 मई तक देशव्यापी लॉकडाउन चल रहा है, इस बीच देश में एक नई बीमारी अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का आगमन शुरू हो चुका है। भारत में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का पहला केस असम में सामने आया है। असम सरकार ने 3 मई, 2020 को बताया कि राज्य में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का पहला मामला पाया गया है तथा इससे 306 गांवों में 2500 से अधिक सूअर मारे जा चुके हैं।

अफ्रीक स्वाइन फ्लू आसानी से मनुष्यों तक पहुंच सकता है

विशेषज्ञों के मुताबिक, अफ्रीकन स्वाइन फ्लू आसानी से मनुष्यों तक पहुंच सकता है, चीन में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू पहले से ही चल रहा है, जिस कारण वहां के करीब 40 फीसदी सूअरों का सफाया हो चुका है। अफ्रीकन स्वाइन फ्लू शुरुआत में खुले घूमने वाले सूअरों को ही चपेट में लिया था, लेकिन बाद यह फॉर्म वाले सूअरों तक पहुंच चुकी है।

अफ्रीक स्वाइन फ्लू का कोविड-19 से कोई भी लेना-देना नहीं– अतुल बोरा

असम के पशुपालन एवं पशु चिकित्सा मंत्री अतुल बोरा ने बताया कि राज्य सरकार केंद्र सरकार से मंजूरी लेने के बाद भी तुरंत सूअरों को मारने के बजाय इस संक्रामक बीमारी को फैलने से रोकने के लिए कोई अन्य रास्ता अपनाएगी। अतुल बोरा ने कहा कि अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का कोविड-19 से कोई भी लेना-देना नहीं है, फिलहाल यह मनुष्यों तक नहीं पहुंच सकता, उस जगहों के सूअरों को खाने में कोई खतरा नहीं है, जहां यह इंफेक्शन नहीं हुआ है।

असम में सुअरों की संख्या करीब 30 लाख

अतुल बोरा ने कहा कि एनआईएचएसएडी यानि राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान, भोपाल ने पुष्टि है कि यह एएसएफ यानि अफ्रीकन स्वाइन फ्लू है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने हमें बताया है कि यह देश में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का पहला मामला है। अतुल बोरा ने कहा कि असम पशुपालन विभाग द्वारा वर्ष 2019 की गणना के मुताबिक, सुअरों की कुल संख्या राज्य में करीब 21 लाख थी, लेकिन अब यह बढ़ कर करीब 30 लाख हो गई है।

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